ये जो चल रहा है तेरे भीतर,,,
यही चल रहा है मेरे भीतर,,
काश अगर वो पल नही आता
तो शायद जीवन कुछ और होता,,
तूने हर वादा निभाया
तूने प्यार का मतलब समझाया
तूने दिल को बहलाया
तूने दिल को समझाया
में इतना भी ना कर पाया
क्यों में तुझे अपना बना ना पाया,,??
क्यों में तेरा हाथ थाम ना पाया,,,??
जो सपने देखे थे साथ बैठ कर
क्यों उनको पूरा कर नही पाया,,,??
क्या में डर गया हूं दुनिया से,,,,
इनके रीति रिवाजों से,,,,
में कायर हु में बुज़दिल हु,,,,,,
जो सोचा था वो कर ना सका,,,,
तेरे बिना भी में मर ना सका,,,,
कल जो पास था मेरा
आज क्यू इतना दूर है
कैसे समझाऊ अब इस दिल को
की तू अब पास नही है ,,
तुझे खोकर अब कोई चाहत नही इस दिल की
बस एक तुही चाहत थी
ओर तू ही चाहत है,,,।
Friday, May 3, 2019
गंतव्य
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रवि
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