अंतर्मन की व्यथा बतलाने दिनकर कोई आया है
जलते तपते तन को लेकर दिनकर कोई आया है
स्वर्ण किरणों को लेकर संग दिनकर कोई आया है
रोशन करने जग को देखो दिनकर कोई आया है
अंतर्मन की व्यथा बतलाने दिनकर कोई आया है,,,,,
जलते हुए तन को लेकर देखो में आया हु
तपते हुए मन को लेकर देखो में आया हु
करने रोशन जग को सारे देखो में आया हु
भोर सवेरे बिना स्वार्थ के देखो में आया हु
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