Tuesday, June 28, 2016

ग़ुम हो जाता हु में

यु देखा ना कर बार बार
ग़ुम हो जाता हु में ।
तेरी याद में
अपनी शख्सियत भूल जाता हु में ।
लेकर में अपने दर्द को
अनजान शेहरो में
रास्ते भूल जाता हु में ।
जब लौट कर आता हु
तन्हा होकर जिस रस्ते में
अपने पेरो के निशान भूल जाता हु में।
जब आता हे खयाल दिल में
तेरे नाम का अपना नाम भूल जाता हु में ।

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