Tuesday, June 28, 2016

उम्मीदों का शहर

शहर जो सपने साकार करे, शहर जो इस बेपरवाह भीड़ में भी उम्मीद जगाये,
कुछ ऐसे ही सपने लेकर आये हम इस खूबसूरत शहर *उदयपुर* में,,,,

उदयपुर उम्मीदों का शहर, हर कोई उदयपुर घूमना चाहता है यहाँ की खूबसूरती को अपने ख्यालो में उतारना चाहता है
जितना खूबसूरत यह  शहर है   उतने ही खूबसूरत यहाँ के लोग,,,

4 साल पहले राजस्थान के नंबर 1 कॉलेज, बीएन कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी  में  एडमिशन  लेते वक्त ये सोच रहे थे की कितने अकेले है हम इस शहर में,

अनजान लोग, अनजान शहर और एक नया वातावरण जहा हमे अगले चार सालो तक यही पर रहना हे पर कोई भी यह नही जानता था की इन चार सालो में इस शहर से इतना  गहरा नाता जुड़ जायेगा।

कॉलेज का  पहला दिन जब जब क्लास में एक दो को छोड़ कर सब एक दूसरे से अनजान थे पर कोई भी यह नही जनता था की आने वाले समय में इन सबसे दोस्ती इतनी गहरी हो जायेगी ।

इस खूबसूरत शहर ने ही हम दोस्तों को मिलाया है  ,पता नही में इस शहर का शुक्रिया कैसे करू,।

1st इयर ख़तम होते होते हमने आधा उदयपुर भी घूम चुके थे और क्लास के आधे लड़के भी दोस्त बन चुके थे
जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे वैसे दोस्ती गेहरी होती गयी  इस  शहर से,,,,

कॉलेज के दोस्तों के साथ घूमना अब आम बात हो गयी थी।

कॉलेज में खूब मझे किये खूब मस्ती की  बोहत बार दोस्तों से लड़ाई भी होती थी पर  वो ज्यादा दिन तक नही चलती थी,,,,

2nd इयर खत्म हुआ हमे पता भी नही चला,,,,

3rd इयर भी ख़तम हो गया और लड़के अभी तक मदन के दूध के हलवे का ही इन्तेजार कर रहे थे ।

4th इयर के एग्जाम हो गए है अब बस कुछ ही दिन बाकी हे इस शहर में फिर सब अपने अपने घर,।

ये चार सालो का सफर कब खतम हो गया कुछ पता ही नही चला,,, बोहत उतार चढ़ाव हुए  इन चार सालो में,,,,
कुछ दिनों बाद सब अपने अपने घर पे होंगे कुछ काम करेंगे और कुछ आगे पढाई करेंगे पर ये 2012 का बैच कोई नही भूल पायेगा,,,,

हमे नही पता था की इन चार सालो में इन अनजान से लगने वाले लड़को से दोस्ती इतनी गेहरी हो जायेगा,,,,

आज जब समय आ गया है एक दूसरे को छोड़ कर जाने का तो सबको लग रहा है की कही ना कही जरूर मिलेंगे पर इस मोबाइल के  जमाने में घर वालो से मिलने का समय नही है तो इनसे कहा मिलना हो पायेगा,,,?
क्या हम कही मिल पाएंगे ?
क्या हमारी फ़ोन पे बात होगी ?

बस यही सवाल जेहन में बार बार आ रहा है ।

समय आ गया हे अब इन सब दोस्तों को और इस शहर को अलविदा कहने का,,,

कुछ बाते जो कभी भूल नही पाएंगे जो हमेशा जेहन में रहेगी,,,,

कही पवन (पापा) की मस्तिया है तो कही
कही ललित ( डायनोसोर ) की शरारते

तनुज छाबड़िया 1st इयर से ही बाते बना रहा है  और आज भी बड़ी बड़ी बाते फेकता है
चार साल पहले भी उसकी सेलेरी 50000 हजार थी और आज  चार साल बाद भी 50000 हजार ही हे

जितेश और हितेश  चारो साल टोपर रहे है पर दुःख की बात हे की वो GPAT  क्रैक नही कर पाये,।

जिहादी युसूफ आज भी उतना ही हसाता है जितना चार साल पहले हँसता था,,,।

चिराग सा और पुष्पा का प्यार पूरी क्लास को पता है,,  गोटिया आज भी दर्द करती है चिराग सा की ।

धीरसा की हाइट चार साल में एक इंच भी नही बड़ी पर सपने बोहत बड़े बड़े है धीरसा के,,,।



बस अब ये सफ़र यही खत्म हो जायेगा और सब फिर से एक नए शहर में नई उम्मीद के साथ ,,,,

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